जागो, आपका जीवन हर एक पल के साथ अपनी आख़िरी मंज़िल—मौत—की तरफ़ बढ़ रहा है। आपकी साँसें सिर्फ़ कुछ ही दिनों की मेहमान हैं, और फिर आप हमेशा के लिए एक अंतहीन नींद में सो जाएँगे।
पर क्या आपको मरने से पहले जाग नहीं जाना चाहिए?क्या हमें इस दुनिया को छोड़ने से पहले एक बार खुलकर जी नहीं लेना चाहिए?
क्या जीवन के आख़िरी वक्त में अफसोस करने से पहले एक बार पूरी कोशिश करके अपने सपनों को साकार नहीं करना चाहिए?
क्या एक बार, जिससे हम प्रेम करते हैं, उसे अपने दिल की बात बिना इस डर के नहीं बता देनी चाहिए कि परिणाम क्या होगा?
ज़रा खुद सोचिए। मौत तो एक न एक दिन आ ही जाएगी, और जब वह आएगी, तब आपके पास यहाँ से जाने के सिवा कोई और रास्ता नहीं होगा।
तो क्या आप इस अफसोस के साथ जाना चाहेंगे कि—काश मैंने थोड़ी हिम्मत की होती…काश मैंने अपने सपनों के लिए कोशिश की होती…काश मैंने जीवन को और भरपूर जिया होता…
अधिकतर लोग इसी “काश” शब्द के साथ इस संसार से चले जाते हैं।
लेकिन यह फैसला आपको करना है— क्या आप जीवन के अंत में पछताना चाहते हैं,या आज ही हिम्मत करके अपने दिल की आवाज़ सुनकर कोई ठोस कदम उठाना चाहते हैं?
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