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The Nature of the Mind: A Double-Edged Sword: Comparative study of Andrews Carnegie and Adolf hitler
April 11, 2026 | by aashishgautam265@gmail.com
हम इस दुनिया में बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं। अगर ध्यान से देखें, तो इंसान की ज़िंदगी एक इच्छा पूरी करने से दूसरी इच्छा पूरी करने में ही निकल जाती है।लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस सफलता की कीमत क्या है? अक्सर यह आपकी मानसिक शांति के बदले आती है।
आज हर व्यक्ति किसी न किसी बात से परेशान है। कोई चिंता में है, तो कोई अवसाद में।
क्या आपने कभी रुककर सोचा है कि क्या आपकी सफलता पाने की चाह इतनी बढ़ गई है कि आप खुद को ही खो रहे हैं? क्या दुनिया की सफलता आपकी अंदर की शांति से ज्यादा कीमती है?
सबसे जरूरी सवाल जो हमें खुद से पूछना चाहिए, वह है: मैं इतना भाग क्यों रहा हूँ? इसके पीछे मेरा उद्देश्य क्या है? आसान शब्दों में, मैं सफलता क्यों पाना चाहता हूँ?
इसका जवाब हमें अरस्तू की किताब निकोमाखियन एथिक्स में मिलता है, जहाँ वे कहते हैं कि जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य खुशी है। अगर यह सच है, तो फिर लोग इतना तनाव क्यों लेते हैं? खुद को दुखी क्यों बनाते हैं?
मुझे लगता है कि इसका कारण यह है कि हमने सफलता को ही अपना अंतिम लक्ष्य बना लिया है और खुशी को भूल गए हैं। हम यह भूल गए हैं कि जो भी लक्ष्य हम हासिल करना चाहते हैं, उनका मकसद हमें खुश करना ही है।
जरा सोचिए, अगर सफलता के साथ चिंता और गहरा दुख मिले, तो क्या वह सच में सफल होना कहलाएगा?
हाल ही में एक 25 साल की लड़की की ज़्यादा काम और उससे पैदा हुए अवसाद के कारण मौत हो गई। वह यह समझ नहीं पाई कि कोई भी काम जीवन से बड़ा नहीं होता।
मैं यहाँ अपनी बात भी ईमानदारी से कहना चाहता हूँ। इस समय मैं भी घबराहट महसूस कर रहा हूँ।कभी-कभी मैं अपने भविष्य को लेकर उदास और चिड़चिड़ा हो जाता हूँ। यह सोचता हूँ कि क्या मुझे पीएचडी में प्रवेश मिलेगा या नहीं? क्या मैं अपने प्रोफेसर बनने के सपने को पूरा कर पाऊँगा? ऐसे सवाल अक्सर मेरे मन में आते हैं।
लेकिन आज मैंने यह समझा है कि कोई भी सपना मेरी मानसिक शांति से बड़ा नहीं है। आखिर मैं प्रोफेसर इसलिए बनना चाहता हूँ ताकि मैं खुश रह सकूँ—तो फिर उसी रास्ते में अपनी मानसिक शांति क्यों खो दूँ?
मैं अभी कोई आसान समाधान नहीं देना चाहता। मैं बस एक सवाल के साथ इसे खत्म करना चाहता हूँ: क्या कोई भी सफलता आपकी ज़िंदगी और आपकी मानसिक शांति से ज्यादा कीमती हो सकती है?