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रेत सा फिसलता जीवन

March 26, 2026 | by aashishgautam265@gmail.com

यह जीवन हमें बहुत कम समय के लिए मिला है, और इसकी सबसे खूबसूरत सच्चाई यही है कि यह किसी भी पल खत्म हो सकता है। हम अपने जीवन में दूर-दूर के सपनों और बड़े-बड़े लक्ष्य बना लेते हैं। लेकिन मौत कभी भी आ सकती है और इन सभी ख्वाबों को एक पल में तोड़ सकती है।

हम इस उम्मीद में जीते हैं कि एक दिन जब हम अपने लक्ष्य तक पहुँचेंगे, तब हमें सच्ची खुशी मिलेगी। लेकिन इस भविष्य की खुशी के पीछे भागते-भागते हम अपने वर्तमान को खो देते हैं।

हम उन छोटी-छोटी खुशियों को जी ही नहीं पाते—जैसे किताब पढ़ने का आनंद, बारिश में भीगने की खुशी, खेल खेलने का मज़ा, या परिवार के साथ चाय पीने का सुकून। ये सभी खुशियाँ किसी मंज़िल पर निर्भर नहीं करतीं। ये तो बस इस पल में जीने और प्रकृति के साथ जुड़ने में ही मिलती हैं।

अगर हम जीवन को ध्यान से देखें और अपने अनुभवों पर विचार करें, तो हमें समझ आएगा कि असली खुशी हर पल को पूरी तरह जीने और प्रकृति के साथ एक होने में है। क्या हम आज में जी नहीं सकते, बजाय इसके कि हम जीवन को कल के लिए टालते रहें? क्या हम कुछ समय के लिए अपने लक्ष्यों की दौड़ को भूलकर फिर से बच्चों जैसे नहीं बन सकते—जो सिर्फ वर्तमान में जीना जानते हैं?

समझदारी भी यही कहती है कि जीवन रेत की तरह धीरे-धीरे फिसल रहा है। चाहे हम अपनी मंज़िल तक पहुँचें या नहीं, हम सब अपने अंतिम पड़ाव—मृत्यु—की ओर बढ़ रहे हैं।

इसलिए, आइए थोड़ी देर के लिए इस भागदौड़ भरी दुनिया से खुद को विराम दें। कुछ समय अपने साथ बैठें और इस पल में मौजूद जीवन की सरल खुशियों को अपनाएं।

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