यह कहानी मटिल्डा लोइज़ेल नाम की एक सुंदर लेकिन महत्वाकांक्षी महिला की है। मटिल्डा का जन्म एक साधारण क्लर्क के घर हुआ था और उसका विवाह भी एक मामूली सरकारी कर्मचारी से हो गया। वह अपने साधारण जीवन से बिल्कुल खुश नहीं थी। उसे लगता था कि वह ऐशो-आराम, सुंदर कपड़ों, गहनों और ऊँचे समाज के लिए बनी है, लेकिन गरीबी और साधारणता उसे हर समय कचोटती रहती थी।
एक दिन उसके पति को शिक्षा मंत्री के यहाँ होने वाले एक भव्य नृत्य-भोज का निमंत्रण मिलता है। पति बहुत खुश होता है, लेकिन मटिल्डा दुखी हो जाती है क्योंकि उसके पास न तो अच्छे कपड़े हैं और न ही गहने। पति अपनी बचत से उसे महँगी पोशाक दिलाता है, फिर भी मटिल्डा परेशान रहती है। अंत में वह अपनी अमीर सहेली मादाम फॉरेस्टियर से एक सुंदर हीरों का हार (Diamond necklace) उधार ले लेती है।
नृत्य-भोज की रात मटिल्डा सबकी नजरों का केंद्र बन जाती है। वह बहुत खुश होती है, लेकिन घर लौटते समय वह हार खो देती है। यह जानकर दोनों पति-पत्नी घबरा जाते हैं। बहुत खोजबीन के बाद भी हार नहीं मिलता। डर के कारण वे सच नहीं बताते और उसी जैसा एक दूसरा हार खरीदने का फैसला करते हैं, जिसकी कीमत बहुत ज्यादा होती है।
नया हार खरीदने के लिए उन्हें भारी कर्ज लेना पड़ता है। अगले दस साल तक मटिल्डा और उसका पति बेहद कठिन जीवन जीते हैं—मटिल्डा घर का सारा काम खुद करती है, मजदूरों जैसा जीवन जीती है और समय से पहले बूढ़ी हो जाती है। अंततः वे सारा कर्ज चुका देते हैं।
कई साल बाद एक दिन मटिल्डा की मुलाकात उसी सहेली से होती है। वह सच्चाई बता देती है कि हार खो गया था और उसकी भरपाई के लिए उन्होंने अपना जीवन संघर्ष में बिता दिया। यह सुनकर सहेली चौंक जाती है और बताती है कि वह हार नकली था, जिसकी कीमत केवल पाँच सौ फ्रैंक थी।
कहानी का संदेश:
यह कहानी दिखाती है कि दिखावा, झूठा अहंकार और सामाजिक दिखावट इंसान का जीवन बर्बाद कर सकते हैं। जीवन कितना अनिश्चित है—एक छोटी-सी भूल पूरे जीवन की दिशा बदल सकती है। सच्चा सुख संतोष और सादगी में है, न कि बाहरी चमक-दमक में।
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