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विश्वास रखो, विजय तुम्हारी है

October 26, 2025 | by aashishgautam265@gmail.com

मैं दुनिया के अच्छे और नेक लोगों से एक सवाल पूछना चाहता हूँ—आख़िर तुम डरते क्यों हो?

अपने सपनों को पूरा करने से डर क्यों लगता है? क्या तुम्हें खुद पर भरोसा नहीं है? क्या तुम्हें अपनी नेक नीयत पर विश्वास नहीं? क्या तुम्हें ईश्वर पर भरोसा नहीं कि वह तुम्हारा मार्गदर्शन करेगा और तुम्हारी मदद करेगा?

अगर तुम्हारे इरादे सच्चे हैं, तो तुम असफल कैसे हो सकते हो? प्रकृति खुद उस इंसान की मदद करती है जो अच्छाई के रास्ते पर चलता है।

किसी से मत डरो। तुम हर लक्ष्य हासिल करने में सक्षम हो। सबसे बड़ी ताकत पहले से ही तुम्हारे अंदर है। जो खुद पर भरोसा करता है, उसके लिए कोई बाधा बड़ी नहीं होती।

फिर असफलता से डर क्यों? आख़िर खोने को है ही क्या? जब तुम इस दुनिया में कुछ लेकर नहीं आए, और जाते समय कुछ ले नहीं जाओगे —तो फिर जीवन के इस सफर में डरना कैसा?

जब भी असफलता का विचार तुम्हें परेशान करे, खुद से कहो —“मृत्यु ही अंतिम पड़ाव है, तो फिर इस जीवन यात्रा में मैं किससे डरूँ?

”हिम्मत से खुद से कहो —“मेरा सपना मानवता की भलाई के लिए है। जब मेरा उद्देश्य नेक है, तो मैं हार कैसे सकता हूँ? मेरे भीतर स्वार्थ नहीं है, तो मुझे डरने की कोई वजह नहीं।

”जैसा स्वामी विवेकानंद ने कहा था —“उठो, जागो, और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।”

इसलिए उठो, अच्छाई के योद्धाओं! कोई तुम्हें हरा नहीं सकता, क्योंकि सत्य और सद्गुण कभी हारते नहीं। तुम्हारी विजय निश्चित है। सिर्फ अच्छाई के बारे में सोचो।बार-बार सोचो कि तुम्हारी सफलता से मानवता को कितना लाभ होगा।

जब तुम्हारी एकमात्र इच्छा रोशनी, दया और भलाई फैलाने की होगी,तब हर लक्ष्य तुम्हारे लिए अपने दरवाज़े खोलेगा,और हर मंज़िल तुम्हारे कदमों में होगी।

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