मैं पूरी दुनिया से एक सीधा सा सवाल पूछना चाहता हूँ:अगर आपको किसी पिंजरे में बंद कर दिया जाए, तो आपको कैसा लगेगा? जहाँ हर दिन हजारों लोग आएँ, आपको घूरें, आप पर हँसें, और आपको सिर्फ मनोरंजन की चीज़ बना दें।
हाँ, आपको अच्छा खाना और सारी सुविधाएँ मिल जाएँ—लेकिन आपकी आज़ादी छिन जाए। मुझे लगता है, कोई भी समझदार इंसान ऐसा “सुनहरा पिंजरा” (Golden cage) कभी नहीं चुनेगा।
तो फिर हम जानवरों को चिड़ियाघरों में क्यों रखते हैं?किस हक से हम उनकी वो आज़ादी छीन लेते हैं, जो उन्हें प्रकृति ने दी है?
जब आप एक ऐसे पक्षी को कैद करते हैं जो उड़ने के लिए बना है, तो आप एक गंभीर पाप करते हैं। यह किसी निर्दोष इंसान को जेल में डालने से अलग नहीं है।
हम अपने सस्ते मनोरंजन के लिए पक्षियों को पिंजरों में कैद कर देते हैं। ऐसा खोखला मनोरंजन केवल एक निर्दयी और कठोर हृदय वाला व्यक्ति ही चाह सकता है।
मैं हर देश की अदालत से पूछना चाहता हूँ:जो लोग जानवरों और पक्षियों की आज़ादी छीनते हैं, उन्हें सजा क्यों नहीं मिलती?
क्या कानून सिर्फ इंसानों के लिए हैं?क्या जानवरों और पक्षियों को जीने और आज़ादी का हक नहीं है?
यह सवाल हमें तब तक परेशान करता रहेगा,जब तक हर कैद जानवर और पक्षी आज़ाद नहीं हो जाता।
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